जो लोग सिर्फ़ बबूलों की बात करते हैं
तुम्हें वो देख के फूलों की बात करते हैं
हटाओ रंज की बातें चलो किनारे पर
गुलों की,पेड़ की, झूलों की बात करते हैं
अजीब मसख़री है के चुनाव आते ही
सियासी लोग उसूलों की बात करते हैं
बहुत सुकून मिलेगा, खिल आएगा चेहरा
चल आ जा बैठ, रसूलों की बात करते हैं
— Mohammad Aquib Khan















