तुम सबका लपाड़ो मैं बाप रहा हूँ
तुम सब से ज़ियादा मैं छाप रहा हूँ
तुम कहके पुकारा तो झटका न खाओ
तुम अब हुआ मुद्दत मैं आप रहा हूँ
अच्छा है कि रोना ले के नहीं आए
इक का नहीं सब का संताप रहा हूँ
तैराक़ नहीं हूँ तो क्या हुआ यारो
पैरों से मैं नद्दी को नाप रहा हूँ
ख़ुद की कभी मुझ सेे तुलना नहीं करना
सब सेे बड़ी चाहत की माप रहा हूँ
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