अच्छा अच्छा सोचा कर
मंज़िल का तू पीछा कर
अपने मन की करता जा
दुनिया की मत परवा कर
कुछ से कुछ हो सकता है
सोच समझ कर वा'दा कर
इस जग में टिकना है तो
अपने कद को ऊँचा कर
ख़ामी तुझ
में है 'अक्षर'
क़िस्मत को मत कोसा कर
— Adarsh Akshar
मंज़िल का तू पीछा कर
अपने मन की करता जा
दुनिया की मत परवा कर
कुछ से कुछ हो सकता है
सोच समझ कर वा'दा कर
इस जग में टिकना है तो
अपने कद को ऊँचा कर
ख़ामी तुझ
में है 'अक्षर'
क़िस्मत को मत कोसा कर
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