दो पल के हैं मेहमान सब
बन जाते पर भगवान सब
बस एक सच को सुनके ही
हो जाते हैं हैरान सब
ऐ दोस्त! तेरे शहर में
क्यूँ इतने हैं नादान सब
जीवन में कुछ ऐसा करो
गाते रहें गुन-गान सब
ख़ुद के लिए रखता कहाँ
कर देता 'अक्षर' दान सब
— Adarsh Akshar
बन जाते पर भगवान सब
बस एक सच को सुनके ही
हो जाते हैं हैरान सब
ऐ दोस्त! तेरे शहर में
क्यूँ इतने हैं नादान सब
जीवन में कुछ ऐसा करो
गाते रहें गुन-गान सब
ख़ुद के लिए रखता कहाँ
कर देता 'अक्षर' दान सब
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