जो भी इज़्ज़त के डर से डर जाए

मत करे इश्क़ अपने घर जाए

बात आ जाए जब दु'आओं पर
इस से बेहतर है बंदा मर जाए

थोड़ी सी और देर सामने रह
मेरी आँखों का पेट भर जाए

अल-मुहैमिन के घर भी ख़तरे हैं
जाए भी तो कोई किधर जाए

हाँ अक़ीदा अगर न क़ैद रखे
फिर तो इंसान कुछ भी कर जाए

बेबसी की ये आख़िरी हद है
मेरी औलाद आप पर जाए

उस के चेहरे पर आज उदासी थी
हाए 'अफ़्कार अल्वी' मर जाए

— Afkar Alvi

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