भुलाकर रंज क़ातिल से भी अपना आश्ना देखें?
बड़ा मुश्किल है आतिश आब में अपना ख़ुदा देखें
कई मल्लाह दरिया में है अपनी छानते नेकी
तो अब तिनके के जिम्में है किसी को डूबता देखें
ज़रूरत आम सी शय की कहीं वहशत न बन जाए
कोई हैरत नहीं गर अब्र में सहरा नशा देखे
— Arihant jain















