
सियाह शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी
मुझे अँधेरों कि आदत तबाह कर देगी
मैं तेरे दुख में बराबर शरीक हूँ सो मुझे
उदास शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी
जो सब्र और तहम्मुल के साथ ईश़्क करे
उसे तुम्हारी मोहब्बत तबाह कर देगी
जो इश्क़ सब्र की दीवार तोड़ दे जानाँ
उसे बदन की ज़रूरत तबाह कर देगी
दुआ सलाम से आगे अगरचे बात बढ़े
तो फिर ये वस्ल की राहत तबाह कर देगी
हसीन चेहरे की आदत है छोड़ जाने की
सो ऐसे शख्श़ की सोहबत तबाह कर देगी
— Md Akhter Ansari















