siwaaye-dar-b-dari us ko KHaak milta hai | सिवाए-दर-ब-दरी उस को ख़ाक मिलता है

  - Alamtaab Tishna
सिवाए-दर-ब-दरीउसकोख़ाकमिलताहै
जोआसमानसेअपनीज़मींबदलताहै
मैंजबभीघरसेनिकलताहूँरातकोतन्हा
चराग़लेकेकोईसाथसाथचलताहै
अजीबहोताहैनज़्ज़रगान-ए-शौक़काहाल
रिदा-ए-माहपहनकरवोजबनिकलताहै
बरु-ए-चश्मरिदा-ए-हिजाबतानलीजाए
वोज़ेर-ए-साया-ए-गुलपैरहनबदलताहै
फ़रेब-ए-क़ुर्बतोदेखोकिमेरेपहलूमें
तमामरातकोईकरवटेंबदलताहै
गुज़ारदेतेहैंआवारा-गर्दआगकेगिर्द
जोबे-ठिकानाहैंउनकाभीकामचलताहै
हमारेदमसेभीहैमौसमोंकीगुल-कारी
चराग़-ए-लालामेंदिलकालहूभीजलताहै
मैंवोशहीद-ए-वफ़ाहूँकिक़त्लकरकेमुझे
मिराग़नीमतअस्सुफ़सेहाथमलताहै
हमेंनसीबहुआऐसीमंज़िलोंकासफ़र
क़दमक़दमपेजहाँरास्ताबदलताहै
हवा-ए-दामन-ए-रंगींयेकहगई'तिश्ना'
हमारेसामनेकिसकाचराग़जलताहै
  - Alamtaab Tishna
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Raat Shayari

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