बुझी आँखों में किरणें भर रही हो, कौन हो तुम?
मेरी नींदों को रोशन कर रही हो, कौन हो तुम?
मुझ ऐसे घर में तो शैतान भी आता नहीं है,
तुम इतने दिन मेरे अंदर रही हो, कौन हो तुम?
मैं जिस की याद में 'रोया' हुआ हूँ वो कहाँ है?
मेरा तावान तुम क्यूँ भर रही हो, कौन हो तुम?
भरे मज
में से कमरे तक तुम्हीं लाई हो मुझ को,
अब इस तन्हाई से ख़ुद डर रही हो, कौन हो तुम?
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