लकीरों में कहीं अज्दाद का पैसा नहीं होता
ग़रीबों का नसीबा हाथ पे लिखा नहीं होता
ये अहल-ए-ज़र ग़रीबों को कभी जीने नहीं देते
अगरचे उस ने सब को एक सा देखा नहीं होता
ये कश्कोल-ए-गदाई है फ़क़त मा'ज़ूर को ज़ेबा
कभी मेहनत-कशों के हाथ में कासा नहीं होता
वो चाहे जैसी भी हो माँ की ममता कम नहीं होती
भले ही आज-कल बेटा हर इक माँ का नहीं होता
विरासत बाँट लेते हैं जो बच्चे अपने हिस्से की
कमाई सब है जिन की उन का ही हिस्सा नहीं होता
भले 'तनवीर' उम्दा खाना क़िस्मत में न हो उस की
किसी मुफ़्लिस का बच्चा भी कभी भूका नहीं होता
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