दिल के सभी मलाल से, पहले बिछड़ गया
कोई मिरे ख़याल से, पहले बिछड़ गया
चाहा था हम ने पूछना क्या हम से इश्क़ है?
लेकिन वो इस सवाल से, पहले बिछड़ गया
बैठे थे दिल लगा के उसी शख़्स से, कि जो
दुश्मन की एक चाल से, पहले बिछड़ गया
क्यूँ ग़म में मुबतिला मैं रहू हिज्र ज़ाद के
जो ख़्वाहिश-ए-विसाल से, पहले बिछड़ गया
कैसे गुज़ारा हम ने, ज़रा हम से पूछिए
जब वो उदास साल से, पहले बिछड़ गया
हम ने भी फिर बताई नहीं दिल कि बात उसे
और वो भी अर्ज़-ए-हाल से पहले बिछड़ गया
अल्ताफ़ हो गई हैं सभी हसरतें तमाम
कोई तिरे ज़वाल से पहले बिछड़ गया
— Altaf Iqbal















