ये शो'ले आज़माना जानते हैं
सो हम दामन बचाना जानते हैं
तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
खनकती नुक़रई दिलकश हँसी में
हम अपना ग़म छुपाना जानते हैं
बुलाना ही नहीं पड़ता है 'अंबर'
ये ग़म अपना ठिकाना जानते हैं
— Ambreen Haseeb Ambar















