Sagar
Sagar
Ghazal

तुम अगर सच्ची लगन से ठान लोगे

खामियाँ बेशक यूँ अपनी जान लोगे

फ़ासले जो दरमियाँ बढ़वा रहे हो
प्यार कम होगा नहीं ये मान लोगे

आज तुम जो कह रहें हो उस ग़ज़ल में
ये बताओ कौन-से अर्कान लोगे

कौन सच्चा दोस्त तेरा जानना है?
आइने में देख लो पहचान लोगे

घर चलाने के लिए पैसे कमाओ
दूसरों के कब तलक अहसान लोगे

दौलतों से भी बड़ी इंसानियत है
इस लिए दौलत नहीं इंसान लोगे

नाम मेरे ग़म तिरे जो कर दिए है
आप इस के बदले में मुस्कान लोगे

इश्क़ में धोखा मिले जायज़ है सागर
टूटते दिल का उठा नुक़सान लोगे

— Sagar

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