तपते सहरा में न दरिया की रवानी में हूँ मैं

अब के किरदार किसी और कहानी में हूँ मैं

इक खंडर ही सही पर याद ये रखना फिर भी
तेरे अज्दाद की बोसीदा निशानी में हूँ मैं

तू तो है आज भी नफ़रत का फ़साना लेकिन
अब भी किरदार मुहब्बत की कहानी में हूँ मैं

मुझ को मतलब है कहाँ सुब्ह की रा'नाई से
कब से खोया हुआ इक रात की रानी में हूँ मैं

लोग जानेंगे कहाँ मेरी हक़ीक़त आसिफ
चाँद का अक्स हूँ पर गादले पानी में हूँ मैं

— Asif Kaifi

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