इस सेे ज़ियादा भी मेरा क्या जाएगा
मुझ को कहानी से निकाला जाएगा
मेरे ग़मो का ख़ात्मा आसाँ नहीं
अँधेरे में कब ये उजाला जाएगा
पहले बहेगा आँखों से दरिया-ए-खूँ
और मय-कदे को फिर मुनाफ़ा जाएगा
ये ज़िंदगी तो ज़िंदगी लगती नहीं
आख़िर में ये रस्ता भी तन्हा जाएगा
चाहे जहाँ जाए मुझे मालूम है
आख़िर समुंदर में ही दरिया जाएगा
माना सफ़र-ए-ज़िंदगी है राएगान
हो साथ हम तो रस्ता अच्छा जाएगा
बिगड़े हुए हैं मेरे सारे यार और
इक दिन हमें भी फिर बिगाड़ा जाएगा
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