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जब किसी सहरा से हो कर एक दरिया जाएगा  - Dr. Anand Kishore

जब किसी सहरा से हो कर एक दरिया जाएगा
तिश्नगी का ख़ौफ़ यारो दिल से मिटता जाएगा

दिन मयस्सर हम को होगा क्या कभी ऐसा भी इक
हर किसी इंसाँ के मुँह में जब निवाला जाएगा

क्या अदावत रूप भी लेगी बग़ावत का कभी
क्या कोई पत्थर यक़ीनन फिर उछाला जाएगा

हादिसा सच-मुच हुआ था सामने मेरे मगर
क्या हक़ीक़त को कभी काग़ज़ पे लिखा जाएगा

देखना वो दौड़ता आ जाएगा मेरी तरफ़
जब इधर से उस की जानिब इक इशारा जाएगा

अहल-ए-दिल से हो सकेगा आज मिलना क्या ख़बर
देखना है हाथ से क्या ये भी मौक़ा जाएगा

उस किनारे की तमन्ना तेरे दिल में है मगर
तू समझ ले दूर तुझ से ये किनारा जाएगा

इस जहाँ में हैं मुसाफ़िर की तरह 'आनंद' सब
फ़ल्सफ़ा जिस ने ये समझा सुख वही पा जाएगा

Dr. Anand Kishore
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