jalwa-e-husn agar zeenat-e-kaashaana bane | जल्वा-ए-हुस्न अगर ज़ीनत-ए-काशाना बने

  - Ghubaar Bhatti
जल्वा-ए-हुस्नअगरज़ीनत-ए-काशानाबने
दस्तरसशम्अ''कोहासिलहोतोपरवानाबने
दिलहोशियाररहेऔरदीवानाबने
येतमन्नाहैकिख़ाकदर-ए-जानानाबने
हुस्नहुस्नयेहैतेरीकरिश्मा-साज़ी
का'बाबनजाएकहींऔरकहींबुत-ख़ानाबने
होशऔरकश्मकश-ए-होशइलाहीतौबा
वहीहोशियारहैउल्फ़तमेंजोदीवानाबने
इसतमन्नासेमैंइश्क़ख़जिलहोताहूँ
दिलकीतक़दीरकिवोहुस्नकानज़रानाबने
हुस्नमहसूससेहैजल्वा-ए-मुतलक़मतलूब
सहीका'बातोदिल-ए-माइलबुत-ख़ानाबने
मय-परस्तीकामुअ'य्यनकोईमेआ'रनहीं
जिसकाजोज़र्फ़होसाक़ीवहीपैमानाबने
उनकीसरशारनिगाहोंकेतसद्दुक़कहिए
हासिल-ए-कैफ़जोपैमाना-ब-पैमानाबने
सोज़उल्फ़तकेख़ुदाशम्अ''नहींहैसही
फूँकइतनामिरीहस्तीकोकिपरवानाबने
साग़र-ए-दिलमेंहैकैफ़िय्यत-ए-सहबा-ए-अलस्त
बूँदबूँदउसकीक्यूँँहासिल-ए-मय-ख़ानाबने
आपइकरोज़तवज्जोहसेजोसुनलेंसर-ए-बज़्म
दिलकीरूदादकाहरलफ़्ज़इकअफ़्सानाबने
आजमुझकोवोमय-ए-होश-रुबादेसाक़ी
औरतोऔरदिलअपनेसेभीबेगानाबने
काशमिटमिटकेमिरीहस्ती-ए-नाचीज़'ग़ुबार'
ख़ाकहोजाएतोख़ाक-ए-दर-ए-जानानाबने
  - Ghubaar Bhatti
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