tinka tinka kaante tode saari raat kataai ki | तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की

  - Gulzar

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की
क्यूँँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की

नींद में कोई अपने-आप से बातें करता रहता है
काल-कुएँ में गूँजती है आवाज़ किसी सौदाई की

सीने में दिल की आहट जैसे कोई जासूस चले
हर साए का पीछा करना आदत है हरजाई की

आँखों और कानों में कुछ सन्नाटे से भर जाते हैं
क्या तुम ने उड़ती देखी है रेत कभी तन्हाई की

तारों की रौशन फ़सलें और चाँद की एक दरांती थी
साहू ने गिरवी रख ली थी मेरी रात कटाई की

  - Gulzar

Alone Shayari

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