क़दम शबाब में अक्सर बहकने लगता है
भरा हो जाम तू अज़-ख़ुद छलकने लगता है
कोई चराग़ अँधेरों में जब नहीं जलता
किसी की याद का जुगनू चमकने लगता है
शब-ए-फ़िराक़ मुझे नींद जब नहीं आती
ये किस का हाथ मिरा सर थपकने लगता है
— Hafeez Banarasi
भरा हो जाम तू अज़-ख़ुद छलकने लगता है
कोई चराग़ अँधेरों में जब नहीं जलता
किसी की याद का जुगनू चमकने लगता है
शब-ए-फ़िराक़ मुझे नींद जब नहीं आती
ये किस का हाथ मिरा सर थपकने लगता है
Other ghazal from the same pen
Shers of promise.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling