"मुहब्बत"

मुहब्बत वो कि जिस को भी मिले सुलतान हो जाए
मुहब्बत बिन हमारी ज़िंदगी वीरान हो जाए

मुहब्बत है तो मुमकिन है ज़माना है फ़साना है
मुहब्बत का नगर तो आशिकों का कारख़ाना है

मुहब्बत राज है दिल का मुहब्बत राजधानी है
मुहब्बत के बिना तो शहर भर में ना-तवानी है

मुहब्बत है तो दुनिया है मुहब्बत है तो हम तुम हैं
मुहब्बत की बदौलत ही चमकते सारे अंजुम हैं

मुहब्बत क़ीमती शय है बड़ी मुश्किल से होती है
मुहब्बत माफ़ करती है अगर क़ातिल से होती है

मुहब्बत तो भरोसा है मुहब्बत ही सख़ावत है
मुहब्बत आँख की ठंडक मुहब्बत रब की रहमत है

— Hameed Sarwar Bahraichi

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