ये मुमकिन नहीं था वो ऐसा करेंगे
के इक फ़ोन करने को सोचा करेंगे
ज़रूरी हो तुम भी ये उस ने कहा था
ज़रूरी हों हम ही तमन्ना करेंगे
ग़लत कर रहा हूँ इसी इक वहम में
मेरी ग़लतियों पर वो शिकवा करेंगे
तेरे पास आना मुनासिब नहीं है
सो अब तुझ को छुप छुप के देखा करेंगे
जुदा जब हुए थे बड़ी सादगी से
उसे ख़ौफ़ था हम तमाशा करेंगे
— Harshwardhan Aurangabadi















