मेरे बज़्म में गर तेरी बात निकले
तो मुमकिन है, अश्कों भरी रात निकले
मैं गर मर गया तो, ये ख़्वाहिश है मेरी
मेरे ख़ाक से तेरी ज़र्रात निकले
यहाँ सबकी आँखों में काँटे चुभेंगे
अगर तेरा 'वर्धन' तेरे सात निकले
— Harshwardhan Aurangabadi
तो मुमकिन है, अश्कों भरी रात निकले
मैं गर मर गया तो, ये ख़्वाहिश है मेरी
मेरे ख़ाक से तेरी ज़र्रात निकले
यहाँ सबकी आँखों में काँटे चुभेंगे
अगर तेरा 'वर्धन' तेरे सात निकले
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