jee huzoori kabhi nahin karta | जी हुजू़री कभी नहीं करता

  - S M Afzal Imam

जी हुजू़री कभी नहीं करता
इसलिए नौकरी नहीं करता

मैं बुराई सभी की करता हूँ
पर कभी आपकी नहीं करता

बातें दिलचस्प मैं भी करता हूँ
हाँ मगर आप सी नहीं करता

बात सुनते तो बीच रस्ते में
मैं यूँँ गाड़ी खड़ी नहीं करता

तेरी ही बातों से मिली हिम्मत
फ़ोन वरना कभी नहीं करता

तीरगी गर अहम नहीं होती
तो ख़ुदा रात ही नहीं करता

दिल कई टूटने से बच जाते
मैं अगर शायरी नहीं करता

  - S M Afzal Imam

Dil Shayari

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