जी हुजू़री कभी नहीं करता
इसलिए नौकरी नहीं करता
मैं बुराई सभी की करता हूँ
पर कभी आपकी नहीं करता
बातें दिलचस्प मैं भी करता हूँ
हाँ मगर आप सी नहीं करता
बात सुनते तो बीच रस्ते में
मैं यूँँ गाड़ी खड़ी नहीं करता
तेरी ही बातों से मिली हिम्मत
फ़ोन वरना कभी नहीं करता
तीरगी गर अहम नहीं होती
तो ख़ुदा रात ही नहीं करता
दिल कई टूटने से बच जाते
मैं अगर शायरी नहीं करता
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