sukhe hont jab pyaas ki zabaan mein baat karte hain | सूखे होंट जब प्यास की ज़बान में बात करते हैं

  - Irshaad Kamil

सूखे होंट जब प्यास की ज़बान में बात करते हैं
तो उम्मीद की शाख़ पर आती है पहली पत्ती
होता है
पहली बार मोहब्बत सुनने जैसा एहसास
सूखे हुए होंट
मुस्कुराहट में बादल की तरह फट जाते हैं
तहस-नहस हो जाता है लफ़्ज़ों का शहर
नहीं सुनाई देती जिस्म की पुकार
अपना सा कोई
फैल जाता है आसमान से ज़मीन तक
छूने की ख़्वाहिश ओस बन जाती है
मिलने की ख़्वाहिश धूप
एहसास के दरिया में बहता रहता है इंसान
सूखे होंटों के साथ भी
ज़िंदगी को तर करता हुआ

  - Irshaad Kamil

Shahr Shayari

Our suggestion based on your choice

    पारा-ए-दिल है वतन की सरज़मीं मुश्किल ये है
    शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें
    Majrooh Sultanpuri
    22 Likes
    तुम्हें मैं क्या बताऊँ इस शहर का हाल कैसा है
    यहाँ बारिश तो होती है मगर सावन नहीं आता
    Bhaskar Shukla
    41 Likes
    तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं
    हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं
    Farhat Ehsaas
    29 Likes
    किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी
    हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
    Nomaan Shauque
    28 Likes
    अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
    उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते
    Rahat Indori
    30 Likes
    अमीर-ए-शहर का रिश्ते में कोई कुछ नहीं लगता
    ग़रीबी चाँद को भी अपना मामा मान लेती है
    Munawwar Rana
    37 Likes
    देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे
    इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे
    Zafar Gorakhpuri
    37 Likes
    एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
    सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है
    Ammar Iqbal
    43 Likes
    रोशनी बढ़ने लगी है शहर की
    चाँद छत पर आ गया है देखिए
    Divy Kamaldhwaj
    63 Likes
    तुम्हारे शहर में तोहमत है ज़िंदा रहना भी
    जिन्हें अज़ीज़ थीं जानें वो मरते जाते हैं
    Abbas Tabish
    40 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Irshaad Kamil

Similar Moods

As you were reading Shahr Shayari Shayari