सवालों में नहीं थे हम, जवाबों में नज़र आए
जिसे देखा नहीं अब तक, वो ख़्वाबों में नज़र आए
ये 'राहत' की विरासत को सॅंभाले रक्खा है हम ने
हमारे जैसे कुछ लड़के किताबों में नज़र आए
ख़ुदा हाफ़िज़ नहीं होता किसी भी मयक़दे में यार
यहाँ से जो भी निकले फिर शराबों में नज़र आए
ग़ज़ल ने यूँ नवाजा़ है कि इस के बा'द 'काविश' हम
फ़क़ीरों में कभी या फिर नवाबों में नज़र आए
— "Nadeem khan' Kaavish"















