kya hogii pedon ki zaat | क्या होगी पेड़ों की ज़ात

  - Kamal Upadhyay
क्याहोगीपेड़ोंकीज़ात
कभीसोचाहैआपने
सवालअटपटाहै
लेकिनक्यूँँनहींबाँटा
उसेहमनेज़ात-पातमें
चलोएकएककरकेबाँटतेहैंपेड़ोंको
फलवालेपेड़औरफूलवालेपेड़
बड़ीबड़ीभुजाओंवाले
छोटीछोटीटहनियोंवालेपेड़
वोआमकापेड़
जोहवनमेंजलताहैं
बाभनहोगा
क्यूँँकिउसकेपत्तोंकीपूजाभीहोतीहैं
फलभीखुबरसीलामंत्रोकीतरह
बबूलकापेड़छायानहींदेता
उसकेकाँटेचुभजाएतोदर्दहोताहै
औरख़ूननिकलताहै
लेकिनबड़ामज़बूतहोताहै
बबूलशायदठाकुरहोगा
बनियातोमहुवाहोगा
उसकेपत्तोंसेपत्तलबनतीहैं
रसीलेफलआँटेमें
मीजकरगुजियाबनातेहैं
सुखाकरउसकेफलदुकानपरबेचदेतेहैं
तेलभीमिलताहैमहुएकीकोइय्यासे
लकड़ीतोउसकीबड़ेकामआतीहैं
कुछपेड़है
जोजल्दीजल्दीबढ़तेहै
उनकीलकड़ीजलावनबनतीहैं
अमलतासमेराहरीजनहोगा
बसबढ़ताहैऔरकटताहै
उसकेकटनेपरकिसीकोदुखनहींहोता
सवालमेरापढ़कर
सोचोगेतुम
पागलहोगयाबस्ती
बहकीबहकीसीबातेंकरताहै
तोक्यूँँनहींसोचते
इंसानोकोज़ात-पातमेंबाँटनेपर
चलोएकएककरके
बाँटतेहैंपेड़ोंको
  - Kamal Upadhyay
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Khoon Shayari

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