हिना जो अस्ल अपना रंग है वो तब दिखाती है
सनम मेरी उसे जब ख़ुद के हाथों में लगाती है
इधर लड़का मुहब्बत में ये ख़ुदस बात करता है
उधर लड़की बुझे चूल्हे पे ही खाना पकाती है
लबों से कुछ नहीं कहती मगर मैं जानता हूँ सब
तुझे मुझ से मुहब्बत है तिरी आँखें बताती है
— Kamlesh Goyal















