मत फेर नज़र वरना बिखर जाएँगे इक दिन
गुल दिल के खिले सारे ही मर जाएँगे इक दिन
दुनिया की बनी राह से चलते हैं जुदा हम
जाते नहीं सब लोग उधर जाएँगे इक दिन
कटते हुए जंगल से परेशाँ हैं परिंदे
उजड़ा जो नशेमन तो किधर जाएँगे इक दिन
इल्ज़ाम हर इक बात का मुझ पर लगा अक्सर
फिर प्याले मेरे सब्र के भर जाएँगे इक दिन
क्यूँ मुश्किलों के दौर का याँ मौत सा मातम
रेग- ए-रवाँ से पल हैं गुज़र जाएँगे इक दिन
तन्हाई के आलम का 'प्रिया' हाल न पूछो
साया ख़ुदी का देखा तो डर जाएँगे इक दिन
— Priya omar















