बिन तुम्हारे ज़िन्दगी मेरी सिफ़र हो जाएगी

रहगुज़र सपनों की अब तो दर-ब-दर हो जाएगी

शम्अ' मैं ने ही जलाए थे शुआओं के लिए
क्या पता था इन हवाओं को ख़बर हो जाएगी

शहर में ये सोच कर मैं ने लगाए पौधे कुछ
साथ गुल के, तितलियों की भी ठहर हो जाएगी

दिल बिछाकर रख दिया है नाज़नीं की राह में
देखना है कब तलक मुझ पे नज़र हो जाएगी

हाल-ए-दिल मेरा न पूछो दोस्तों बन के तबीब
हर दवा इस इश्क़ में अब बे-असर हो जाएगी

आबले दिल पर पड़े, नासूर बन रिसने लगे
दर्द से ये ज़िन्दगी अब मुख़्तसर हो जाएगी

दो सदा मुझ को कभी तन्हाई की तारीकी में
स्याह रातों में "प्रिया' उजली सहर हो जाएगी

— Priya omar

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