नज़र में कौन है जिस के नशे में चूर हैं अब हम
उसी पे मुब्तला दिल और ख़ुदस दूर हैं अब हम
तसव्वुर रोज़-ओ-शब उस का सताता ही रहा हम को
अजब दीवानगी के ख़्वाब से भरपूर हैं अब हम
लबों की सुर्ख़ रंगत आँखों के अंजाम मत पूछो
हसीं संदल बदन की मुश्क में महरूर हैं अब हम
ज़माने की कही कोई हिदायत याद क्यूँ रहती
हुआ दीदार जब से इक बशर माजूर हैं अब हम
कभी वो हाल-ए-दिल पूछे दिवाने को सुकूँ आए
फ़क़त बेताबियाँ ओढे़ बदन मामूर हैं अब हम
— Priya omar















