न मुल्ला हूँ न मुफ़्ती हूँ न वाइज़ हूँ न क़ाज़ी हूँ

गुनहगार ओ ख़ता-कार ओ रज़ा-ए-हक़ पे राज़ी हूँ

जहाँ से हूँ यहाँ आया वहाँ जाऊँगा आख़िर को
मिरा ये हाल है यारो न मुस्तक़बिल न माज़ी हूँ

मैं हूँ नादान दूर-उफ़्तादा दानाई के दीवाँ से
न सानी हूँ सहाबी का न हम-बज़्म-ए-बयाज़ी हूँ

परेशाँ दिल हूँ मैं तंहाई से 'मातम' ज़माने में
न हम-दाैरान-ए-फ़ैज़ी हूँ न हम-अस्र-ए-फ़याज़ी हूँ

— Maatam Fazl Mohammad

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