भाने लगे जब से दिलों को तन नए
सो मिट गए इस में बहुत जीवन नए
आशिक़ न मानेंगे मिरा कहना मगर
रहते नहीं घर में सदा दर्पन नए
ख़ुशियाँ सभी हाँ इश्क़ मैं मेरी लगी
मुझ को खले है प्यार के कंगन नए
बारिश नई उन को बहुत अच्छी लगे
देखे नहीं जिस ने कभी सावन नए
ये ज़िंदगी इस इश्क़ में बर्बाद है
फिर भी नहीं होते किसी के मन नए
इस मौत से होगी कभी शादी मिरी
होंगे किसी के हम कभी साजन नए
— Manish watan















