छोड़ ये ज़िद के हसीं और हसीं होना हैसब को इक रोज़ ही जब ज़ेरे ज़मीं होना हैबा'द उस के कभी मरने की जो नौबत आ जाएइतना पागल भी मुहब्बत में नहीं होना है— Mohd Asad