अश्क आँखों के जब सूख जाने लगे
हम लहू आँख से फिर बहाने लगे
उनके वादा-ए-महशर पे करके यक़ीं
मौत से आँख अक्सर मिलाने लगे
शे’र वो फ़ैज़ का सर चढ़ा इस तरह
'इश्क़ में दाव पर जाँ लगाने लगे
पा के छालों पे मरहम लगाया तनिक
ज़ख़्म सीने के सब मुस्कुराने लगे
दाद में आह पर वाह मिलने लगी
फिर ग़ज़ल दर ग़ज़ल ग़म सुहाने लगे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Manmauji
our suggestion based on Manmauji
As you were reading Dar Shayari Shayari