hañsi tumhi ne ata ki tumhi ne le li hai | हँसी तुम्ही ने अता की तुम्ही ने ले ली है

  - Manmauji

हँसी तुम्ही ने अता की तुम्ही ने ले ली है
बची जो चश्म-ए-मसर्रत नमी ने ले ली है

न फ़िक्र कर कि बिछड़ कर मैं हो गया तन्हा
तेरी जगह जो थी तेरी कमी ने ले ली है

हमें पता न चला क्यूँ कब और कैसे हुआ
जगह हमारी अचानक किसी ने ले ली है

वो इक चराग़ जो रौशन किए हुए था घर
कि उसकी जान किसी मज़हबी ने ले ली है

मेरी ममात पे मातम की क्या ज़रूरत थी
दी जिसने ज़िंदगी वापिस उसी ने ले ली है

  - Manmauji

Shama Shayari

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