कर लिया था इक दफा जो आशिक़ी

तब से मुश्किल में है यारों ज़िंदगी

कहते हैं सब चाहने वाले मेरे
ले के डूबेगी तुम्हें ये बे-दिली

झूठ कहते हैं ये सब के साथ हूँ
है असल में साथ में बस शा'इरी

बे-वफ़ा का बे कहा मैं ने फ़क़त
और सब को याद तुम आने लगी

अब ज़रूरत है नहीं श्रृंगार की
क्या कयामत ढा रही है सादगी

सपने और तक़दीर के इस खेल में
एक दिन हारी मिलेगी ज़िंदगी

— Murari Mandal

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