ek raahi ajnabi ki rahnumaai ki taraf | एक राही अजनबी की रहनुमाई की तरफ़

  - Nikhil
एकराहीअजनबीकीरहनुमाईकीतरफ़
चलपड़ाथाइश्क़मेंमैंइंतिहाईकीतरफ़
आजकलपरटालतेथेइस
मेंहमभीक्याकरें
खींचताथाकोइहमकोचारपाईकीतरफ़
मुश्किलोंसेपारकरताहूँनदीयेशबकोमैं
सुब्हलेआतीहैफिरसेइब्तिदाईकीतरफ़
तीरगीकेबीचमेंलेकरशमआकोहाथमें
रातभरचलतारहामैंरौशनाईकीतरफ़
आरज़ूयेहैमेरी,माथावोमेराचूमकर
ग़ौरभीचाहेकरनाजग-हँसाईकीतरफ़
बद-नसीबीऔरबहानेहैंहीदिलबहलानेको
रातहैहीरौशनीकीआज़माईकीतरफ़
तैरसकताथाकिसीमैंकंपटीशनमेंमगर
बेबसीलेआईमुझकोनाख़ुदाईकीतरफ़
ना-उम्मीदीइसक़दरघरकरगईसीनेमेंफिर
मरगयावोदेखतारक्खीदवाईकीतरफ़
मैंतोसोज़ोसाज़मेंउसकेतरानेगाताहूँ
वोभीमेरीतरहहोइसहमनवाईकीतरफ़
जोपुरानाहोगयामातमकागानाहोगया
ग़ौरकरताहैकहाँकोईभीकाईकीतरफ़
  - Nikhil
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Ujaala Shayari

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