हर तरफ़ के रास्ते जो बंद होते जाएँगे
होशियार और अक़्ल-मंद होते जाएँगे
दिल लगाएँगे तो ना पसंद ही करेंगे लोग
ठोकरें लगाएँगे पसंद होते जाएँगे
खुलते-खुलते एक दुनिया इतनी खुल सी जाएगी
होते-होते और ज़माने बंद होते जाएँगे
सच बताएँगे तो नजरों से गिरेंगे आप ही
और छुपाएँगे तो दर्द-मंद होते जाएँगे
हर कमाल इम्तिहान आइना-दर-आइना
पास फ़ेल छोड़िए बुलंद होते जाएँगे
— Abuzar kamaal















