zeest kya hai himaaqaton ke siva | ज़ीस्त क्या है हिमाक़तों के सिवा

  - Rabia Fakhri
ज़ीस्तक्याहैहिमाक़तोंकेसिवा
चंदज़ालिमसदाक़तोंकेसिवा
हमनेदानिशवरोंसेक्यासीखा
उलझीउलझीइबारतोंकेसिवा
फ़नकोविर्सेमेंक्यादियाहमने
ख़ूब-सूरतअलामतोंकेसिवा
हमनेइसज़िंदगीसेक्यापाया
चंदज़ेहनीरफ़ाक़तोंकेसिवा
इनबड़ीताक़तोंकेपासहैक्या
छोटीछोटीरक़ाबतोंकेसिवा
आस्तीनोंमेंदोस्तोंकीहैक्या
पस-ए-पर्दाअदावतोंकेसिवा
क्याहैतहज़ीब-ए-मग़रिबीकानिशाँ
ऊँचीऊँचीइमारतोंकेसिवा
येसियासतकीगर्मी-ए-रफ़्तार
क्याहैमोहमलबुझारतोंकेसिवा
क्यालियाहमनेअपनेमाज़ीसे
नीम-मुर्दारिवायतोंकेसिवा
अपनीमंज़िलनहींकोईशायद
जानलेवामसाफ़तोंकेसिवा
अपनासरमाया-ए-हयातहैक्या
रंग-दर-रंगसाअ'तोंकेसिवा
  - Rabia Fakhri
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Manzil Shayari

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