आज उस ने हमें ऐसा तोहफ़ा दिया
आँख भर आई जब उस ने धोखा दिया
एक दिन उस की बाहों में मर जाते हम
हिज्र ने हम को जीने का मौका दिया
धूप से हम को तब थोड़ी राहत मिली
जब शजर ने हमें अपना साया दिया
देख कर अपनी परछाई मैं डर गया
तेरी आवाज़ ने मुझ को चौंका दिया
धोखा देना तो बेहद बुरी बात है
बस यही बोल कर सब को धोखा दिया
एक दीवार जो तप रही थी रचित
एक दीवार को हम ने साया दिया
— Rachit Sonkar















