तुम्हें छू के हम कितना पछता रहे हैं
जले हाथ हमको ये बतला रहे हैं
हुई उम्र पूरी मोहब्बत की अपनी
सो हम अब मोहब्बत को दफ़ना रहे हैं
तुम्हें छोड़ कर जा चुका है वो कब का
मुझे सब बहुत दिन से समझा रहे हैं
बहलता नहीं हूँ मैं बातो से लेकिन
मुझे फिर भी बातो से बहला रहे हैं
तुम्हें देखने का नहीं मन हमारा
सो अब तेरी तस्वीर हटवा रहे हैं
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