बिके हुए लोगों को नेता लिखते हैं हम
माफ़ कीजिए थोड़ा कड़वा लिखते हैं हम
जो भी करते हैं पूरे दिल से करते हैं
कम लिखते हैं लेकिन अच्छा लिखते हैं हम
न उजले को मैला न मैले को उजला
जो जैसा है उस को वैसा लिखते हैं हम
ग़ज़लों में बन जाती है तस्वीर तुम्हारी
पढ़कर देखो जानम कैसा लिखते हैं हम
बुरी नज़र वालों को लिखते हैं महिषासुर
और हर इक लड़की को दुर्गा लिखते हैं हम
जलने वाले तो हम से भी जलकर यारो
कहते हैं के ऐसा वैसा लिखते हैं हम
लिखना होता है जब भगवे और हरे पर
श्वेत मिलाकर "सहर" तिरंगा लिखते हैं हम
— Richa Choudhary Sahar















