फूल कलियाँ छोड़ कर तलवार पर मैं ने लिखा

आज अपनी जीत अपनी हार पर मैं ने लिखा

आप बस मेरे लब-ओ-रुख़्सार पर लिखते रहे
आप के अच्छे बुरे व्यवहार पर मैं ने लिखा

देखने आई थी सागर की हसीं लहरों को मैं
दिख गया जब डूबता मँझधार पर मैं ने लिखा

चार दीवारी में जबसे क़ैद है ये ज़िन्दगी
आप का ही नाम हर दीवार पर मैं ने लिखा

माँ पे लिखकर यूँ लगा मैं ने लिखा भगवान पर
बाप पे लिखकर लगा संसार पर मैं ने लिखा

— Richa Choudhary Sahar

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