येवस्लकीवहशतहैइबादतकीघड़ीहै
नाराज़फ़रिश्तोंकीक़समटूटरहीहै
ऐशो'ला-ए-पुर-जोशतवज्जोहमैंइधरहूँ
बद-मस्तइधरदेखजिधरआगलगीहै
सुनतेहैंख़ुदारूठगयाहैनहींसुनता
हालाँकिमिरेशहरकाहरशख़्सवलीहै
ऐयारमुयस्सरकामज़ालेकेजुदाहो
इसमौसम-ए-गुलमेंतुझेजानेकीपड़ीहै
येआँखजिसेबोझसमझताहैमियाँतू
येबार-ए-हज़ीमतकोउठानेकीनफ़ीहै
मुझसेमिरेसय्यादनेवहशतसेकहाजा
लेआजसेतूमेरीमोहब्बतसेबरीहै
हरचीज़बदलदीहैमगरकुछनहींबदला
कहनेकोचमन-ज़ारकीहरशाख़नईहै