dar dar firte logon ko dar de maula | दर दर फिरते लोगों को दर दे मौला

  - SALIM RAZA REWA

दर दर फिरते लोगों को दर दे मौला
बंजारों को भी अपना घर दे मौला

जो औरों की ख़ुशियों में ख़ुश होते हैं
उन का भी घर ख़ुशियों से भर दे मौला

ज़ुल्म-ओ-सितम हो ख़त्म न हो दहशत-गर्दी
अम्न-ओ-अमाँ की यूँँ बारिश कर दे मौला

भूके प्यासे मुफ़्लिस और यतीम हैं जो
उन पर भी कुछ रहम-ओ-करम कर दे मौला

जो करते हैं ख़ून-ख़राबा ज़ुल्म-ओ-सितम
उन के भी दिल में थोड़ा डर दे मौला

मस्त मगन मैं उड़ूँ परिंदों के जैसा
मुझको भी वो ताक़त वो पर दे मौला

  - SALIM RAZA REWA

Anjam Shayari

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