गले मिलना है हम को ज़िन्दगी से

नहीं हासिल हुआ कुछ ख़ुद-कुशी से

ज़रा सा मुस्कुराओ रौशनी हो
बहुत तंग आ गए हम तीरगी से

ये रौशनदान घर का बंद कर दो
कि जुगनू मर रहे हैं रौशनी से

ऐ मेरे दोस्त झगड़ा मत करो तुम
उठा ले जाओ सब कुछ ख़ामुशी से

बनी है जाँ की जो मुश्किल हमारी
निकल कर जा रहे हैं उस गली से

जो ग़म में साथ न दे पाए 'शहज़ान'
भला क्या फ़ाइदा उस दोस्ती से

— Shahzan Khan Shahzan'

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Khudkushi Shayari

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