ये क्या मेरे ग़मों का सिलसिला है अब

पुराना घाव मेरा क्यूँ दुखा है अब

कोई इंसान सुलझा ही नहीं सकता
मेरा झगड़ा ख़ुदा से चल रहा है अब

भुलाने हैं मुझे अब इश्क़ के क़िस्से
तिरी यादों से दिल उकता गया है अब

शिकन माथे की मेरी कह रही है ये
जिसे पाना था उस को खो दिया है अब

हमीं ने तो हँसाया था सभी को और
हमीं हैं जिस को रोना पड़ रहा है अब

मिरे कमरे में अब रोता नहीं हूँ मैं
कोई कमरे में या'नी आ गया है अब

मुझे चाहत नहीं अब मिलने की मुझ से
तुम्हारे बा'द मुझ में क्या बचा है अब

जो लड़का सब से आगे रहता था हर दम
वो लड़का सब से पीछे रह गया है अब

तुम्हारा 'शान्तनु' जो खुल के जीता था
तड़प कर 'शान्तनु' वो मर चुका है अब

— Shantanu Bhardwaj

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