यही इक बात तेरे बा'द आती है
मुझे अब देख मेरी याद आती है
कोई सुनता न था पहले हमारे दर्द
हमारे दर्द पे अब दाद आती है
यहाँ आ कर नहीं करता कोई अपनी
वहीं से ज़िन्दगी बर्बाद आती है
कभी होना नहीं जिस लड़की को मेरा
मुझे हर पल उसी की याद आती है
तजुर्बा है तेरे अब इश्क़ का हम को
हमें बच्चों की अब फ़रियाद आती है
जो तेरी याद में हम ने बिताई उम्र
वही हम को नज़र आबाद आती है
— Shantanu Bhardwaj















