ग़म तो हॅंस कर बता दिए हम ने
आँसू अपने छुपा लिए हम ने
ज़िंदगी चार दिन की थी लेकिन
चार दिन भी कहाँ जिए हम ने
ज़ख़्म जो भी दिए थे उस ने दोस्त
ज़ख़्म वो ही नहीं सिए हम ने
जो नहीं करने थे जवानी में
काम सारे वही किए हम ने
देख ले तुझ को पाने की ख़ातिर
यार भी अपने खो दिए हम ने
घर करे दिल में कोई कैसे अब
रस्ते सब बंद कर दिए हम ने
— Shantanu Bhardwaj















