नहीं है दिन कोई भी जब तुझे खोया नहीं हम ने
नहीं है शाम कोई ख़ुद को जब कोसा नहीं हम ने
तुझे पाने का जो था सपना सपना ही रहा अपना
सो तेरे बा'द में सपना कोई देखा नहीं हम ने
तिरे होंठों का बाक़ी है अभी तक स्वाद होंठों पर
तिरे होंठों के आगे और कुछ चूमा नहीं हम ने
लगाएँ दिल कहीं कैसे किसी और से बता तू ही
सिवा तेरे किसी का चेहरा तक देखा नहीं हम ने
हमें मिल कर भी तेरी लिपस्टिक है तेरे होंठों पर
शरारत की नहीं हम ने तुझे चूमा नहीं हम ने
हैं मरने के हमें सौ रास्ते और सौ बहाने भी
प' माँ का सोच कर ख़ुद को कभी मारा नहीं हम ने
— Shantanu Bhardwaj















